‘कोई मिल गया’ के ‘जादू’ के पीछे कौन था? 250 फिल्मों में काम करने के बाद भी क्यों रहे गुमनाम?

 

‘कोई मिल गया’ के ‘जादू’ के पीछे कौन था? 250 फिल्मों में काम करने के बाद भी क्यों रहे गुमनाम?

साल 2003 में रिलीज़ हुई ‘कोई मिल गया’ बॉलीवुड की पहली साइंस-फिक्शन फिल्मों में से एक थी। इस फिल्म ने दर्शकों को एक नए तरह के एलियन कैरेक्टर से मिलवाया— ‘जादू’

कोई मिल गया का जादू
”कोई मिल गया” हृतिक रोशन और जादू 



‘कोई मिल गया’ के ‘जादू’ के पीछे कौन था? 250 फिल्मों में काम करने के बाद भी क्यों रहे गुमनाम?

साल 2003 में रिलीज़ हुई ‘कोई मिल गया’ बॉलीवुड की पहली साइंस-फिक्शन फिल्मों में से एक थी। इस फिल्म ने दर्शकों को एक नए तरह के एलियन कैरेक्टर से मिलवाया— ‘जादू’। उसकी चमकती आँखें, लंबा सिर और बच्चों की तरह मासूम हरकतों ने उसे हर किसी का चहेता बना दिया। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस किरदार के पीछे एक प्रतिभाशाली अभिनेता थे, जिनका नाम था इंद्रवदन जे. पुरोहित?

इंद्रवदन पुरोहित ने 250 से अधिक फिल्मों और टीवी शोज में काम किया, लेकिन उनकी पहचान कभी उतनी लोकप्रिय नहीं हुई, जितनी उनकी निभाई गई भूमिकाओं की हुई। आइए जानते हैं उनके बारे में।


3 फुट के इस अभिनेता ने ‘जादू’ को बनाया जीवंत

इंद्रवदन पुरोहित का कद महज 3 फुट था, लेकिन उनकी प्रतिभा किसी से कम नहीं थी। उन्होंने न केवल हिंदी, बल्कि गुजराती, मराठी और कई अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया।

‘कोई मिल गया’ में जादू के कैरेक्टर को जीवंत बनाने के लिए, उन्हें एक भारी और मोटे सूट में रहना पड़ा, जिससे चलना और सांस लेना बेहद मुश्किल हो जाता था। बावजूद इसके, उन्होंने अपनी एक्टिंग और बॉडी लैंग्वेज से ‘जादू’ को पर्दे पर असली एलियन जैसा बना दिया।


अन्य फिल्मों और टीवी शोज में भी किया कमाल

इंद्रवदन पुरोहित सिर्फ ‘कोई मिल गया’ तक ही सीमित नहीं थे। उन्होंने कई टीवी शोज में भी काम किया, जिनमें सबसे लोकप्रिय शो था—

‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’, जहां उन्होंने दयाबेन के चाचा ‘चंद्रकांत’ का किरदार निभाया था।

इसके अलावा, वे ‘शक्तिमान’ और महाभारत जैसे क्लासिक शोज में भी नजर आए थे।


इंद्रवदन पुरोहित
इंद्रवदन पुरोहित तारक मेहता का उल्टा चश्मा 



इतनी फिल्मों के बावजूद क्यों रहे गुमनाम?

  • बॉलीवुड में कई छोटे कद के कलाकार होते हैं, जिन्हें अक्सर साइड रोल या कॉमिक किरदार मिलते हैं।
  • ‘जादू’ जैसे किरदार में उन्होंने अपना चेहरा नहीं दिखाया, जिससे बहुत कम लोग उनके बारे में जानते थे।
  • बॉलीवुड में पहचान पाने के लिए सिर्फ टैलेंट ही काफी नहीं होता, सही मौकों और प्रचार की भी जरूरत होती है।

इंद्रवदन पुरोहित ने फिल्म इंडस्ट्री में एक लंबी पारी खेली, लेकिन उनकी उपलब्धियों को वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे।


2014 में हुआ निधन, लेकिन यादें हमेशा जिंदा रहेंगी

साल 2014 में इंद्रवदन पुरोहित का निधन हो गया। हालांकि, आज भी जब लोग ‘कोई मिल गया’ देखते हैं, तो ‘जादू’ की मासूमियत और भावनाएं उन्हें याद आती हैं।

उनका योगदान उन गुमनाम कलाकारों की फेहरिस्त में शामिल है, जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर दर्शकों को अनमोल यादें दीं।


निष्कर्ष: पर्दे के पीछे के कलाकार भी असली हीरो होते हैं

इंद्रवदन पुरोहित की कहानी हमें यह सिखाती है कि हर सफल फिल्म के पीछे कई अनदेखे कलाकार होते हैं, जो अपने दमदार प्रदर्शन से किसी भी किरदार को जीवंत बना देते हैं।

‘कोई मिल गया’ आज भी याद किया जाता है, और इसके पीछे जादू का किरदार निभाने वाले इंद्रवदन पुरोहित की मेहनत हमेशा अमर रहेगी।

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