श्रीदेवी का किसिंग सीन विवाद: जब कोर्ट पहुंचा था मामला और थम गई थी फिल्म 'गुरु' की रिलीज़
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| श्रीदेवी का किसिंग सीन विवाद: जब कोर्ट पहुंचा था मामला |
भारतीय सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार श्रीदेवी और उनका विवादित अनुभव
भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में श्रीदेवी का नाम एक ऐसे सितारे के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने न सिर्फ हिंदी सिनेमा बल्कि तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषाओं में भी अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया। 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने जो मुकाम हासिल किया, वह आज भी बहुत सी अभिनेत्रियों के लिए एक सपना है। परंतु इतनी सफल करियर के बावजूद उनका जीवन विवादों से अछूता नहीं रहा। ऐसा ही एक मामला था फिल्म ‘गुरु’ से जुड़ा, जिसमें एक किसिंग सीन को लेकर श्रीदेवी कोर्ट तक जा पहुंचीं और फिल्म की रिलीज़ तक रुकवा दी।
फिल्म ‘गुरु’ और किसिंग सीन का विवाद
फिल्म की पृष्ठभूमि
साल 1989 में निर्देशक उमेश मेहरा फिल्म ‘गुरु’ बना रहे थे, जिसमें श्रीदेवी और मिथुन चक्रवर्ती लीड रोल में थे। फिल्म की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी थी, लेकिन एक किसिंग सीन को लेकर ऐसी हलचल मच गई कि फिल्म की रिलीज़ को टालना पड़ा। यह किसिंग सीन मिथुन चक्रवर्ती और श्रीदेवी के बीच फिल्माया गया था, लेकिन जैसे ही श्रीदेवी को पता चला कि यह सीन फिल्म में रखा गया है, उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया।
रिश्ते में आई दरार और श्रीदेवी का विरोध
मिथुन और श्रीदेवी के संबंध
कहा जाता है कि मिथुन और श्रीदेवी एक समय बेहद करीब थे, लेकिन ‘गुरु’ की शूटिंग के दौरान दोनों के रिश्तों में खटास आ गई थी। ऐसी स्थिति में किसिंग सीन को फिल्माना और फिर उसका रिलीज़ होना श्रीदेवी के लिए असहज करने वाला था। उन्होंने पहले तो सीन के लिए हामी भरी थी, लेकिन बाद में इस पर आपत्ति जताई।
श्रीदेवी का कोर्ट जाना और फिल्म पर रोक
श्रीदेवी ने निर्देशक उमेश मेहरा को सख्त शब्दों में चेतावनी दी कि अगर यह सीन फिल्म से नहीं हटाया गया तो वे कानूनी कार्रवाई करेंगी। श्रीदेवी के पिता न केवल एक वकील थे, बल्कि कांग्रेस पार्टी से भी जुड़े हुए थे, इसलिए उनका प्रभाव राजनीतिक और कानूनी रूप से भी था।
श्रीदेवी की माँ का बयान
श्रीदेवी की माँ ने सार्वजनिक रूप से कहा:
"उमेश मेहरा ने हमें धोखा दिया है। हमने शुरू से ही किसिंग सीन से इनकार कर दिया था, लेकिन फिर भी उन्होंने कुछ एक्स्ट्रा लोगों को लेकर ऐसा सीन शूट किया जिससे लगने लगे कि श्रीदेवी ने यह किया है। यह गलत है।"
मीडिया और फिल्म इंडस्ट्री में फैली अफवाहें
उमेश मेहरा की सफाई
उमेश मेहरा ने दावा किया कि उन्होंने श्रीदेवी के साथ यह सीन फिल्माया था और वह इसे हटाना नहीं चाहते थे। हालांकि, श्रीदेवी का कहना था कि यह सीन किसी बॉडी डबल या एडिटिंग ट्रिक से ऐसा दिखाया गया जैसे उन्होंने किया हो।
अफवाहों का असर
यह मामला इतना गंभीर हो गया कि स्टारडस्ट जैसी प्रतिष्ठित फिल्म मैगजीन में भी इस पर रिपोर्ट छपी। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म निर्माता ने यह कोशिश की थी कि सीन को फिल्म से हटाए बिना रिलीज़ किया जाए, जिससे विवाद और गहरा गया।
आखिरकार फिल्म का सीन बदला गया
लगातार दबाव और श्रीदेवी के कानूनी एक्शन की धमकी के बाद निर्देशक को झुकना पड़ा। उन्होंने न सिर्फ सीन को हटाया बल्कि फिल्म की रिलीज़ में भी काफी देरी हुई। अंततः फिल्म ‘गुरु’ को उस वर्ष रिलीज़ किया गया, लेकिन तब तक यह विवाद फिल्म से ज्यादा प्रसिद्ध हो चुका था।
श्रीदेवी का इंटरव्यू: "यह मेरा सबसे बुरा अनुभव था"
बाद में एक इंटरव्यू में श्रीदेवी ने साफ तौर पर कहा कि:
"गुरु फिल्म के दौरान मुझे सबसे बुरा अनुभव हुआ। मैंने सीन करने से मना किया था लेकिन फिर भी मेरी मर्जी के बिना वो सीन शूट किया गया।"
उनका यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि कलाकार की सहमति के बिना फिल्म में कोई सीन रखना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कानूनी रूप से भी विवाद का कारण बन सकता है।
यह विवाद क्यों महत्वपूर्ण है?
फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की सहमति का महत्व
इस मामले ने फिल्म इंडस्ट्री को एक स्पष्ट संदेश दिया कि कलाकार की सहमति के बिना कोई भी सीन शूट या रिलीज़ नहीं किया जा सकता। श्रीदेवी जैसी स्टार का विरोध न केवल कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है, बल्कि निर्माता के करियर को भी प्रभावित कर सकता है।
महिला कलाकारों के अधिकार
श्रीदेवी ने एक महिला होने के नाते जिस तरह से अपनी सीमाएं तय कीं और उनका बचाव किया, वह आज की नई पीढ़ी की एक्ट्रेसेज़ के लिए एक मिसाल है।
नतीजा और आज की स्थिति
‘गुरु’ फिल्म भले ही विवादों के साथ रिलीज़ हुई हो, लेकिन श्रीदेवी की इस लड़ाई ने भारतीय सिनेमा में एक नई सोच की शुरुआत की। आज कलाकारों के कॉन्ट्रैक्ट में साफ-साफ लिखा जाता है कि किस तरह के सीन किए जाएंगे और किन सीन पर उनकी सहमति ज़रूरी है।
निष्कर्ष: जब श्रीदेवी ने दिखाया साहस
श्रीदेवी सिर्फ अभिनय में ही नहीं, अपने आत्मसम्मान और सिद्धांतों के लिए भी जानी जाती थीं। 'गुरु' फिल्म के किसिंग सीन विवाद ने साबित किया कि वो एक सशक्त महिला थीं, जो अपने अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जा सकती थीं। आज जब हम उन्हें याद करते हैं, तो उनके अभिनय के साथ-साथ उनके साहसी कदमों को भी नमन करते हैं।
नोट: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न विश्वसनीय समाचार स्रोतों और रिपोर्ट्स पर आधारित है, जिन्हें हमने अपने शब्दों में प्रस्तुत किया है।
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