"1 हीरोइन के साथ 12 फिल्में, सुपरस्टार बना लेकिन करियर के आखिरी दिनों में जताया बड़ा पछतावा!"
बॉलीवुड के इस दिग्गज अभिनेता का फिल्मी सफ़र कई दिलचस्प कहानियों से भरा हुआ है। उनकी यात्रा में एक ऐसा अध्याय भी है, जहां उन्होंने अपने पिता के कर्ज को चुकाने के लिए अभिनय की दुनिया में कदम रखा। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी पत्नी के साथ 12 फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें जीवनभर एक जैसे किरदार निभाने का मलाल भी रहा। जानिए कौन है वो अभिनेता..!
"1 हीरोइन के साथ 12 फिल्में, सुपरस्टार बना लेकिन करियर के आखिरी दिनों में जताया बड़ा पछतावा!"
बॉलीवुड के रोमांटिक हीरो के तौर पर पहचान बनाने वाले ऋषि कपूर ने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने अपने पिता राज कपूर का कर्ज चुकाने के लिए फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था। उन्होंने अपने करियर में नीतू सिंह के साथ 12 फिल्मों में काम किया, लेकिन उम्रभर उन्हें एक जैसे किरदार निभाने का अफसोस रहा।
इस ब्लॉग में हम जानेंगे ऋषि कपूर के करियर, उनकी चुनौतियों और उनके दिल की वो बात जो वह हमेशा कहते रहे।
राज कपूर के कर्ज ने बनाया हीरो
ऋषि कपूर फिल्मी परिवार से थे, लेकिन उनकी पहली फिल्म की वजह केवल ग्लैमर नहीं, बल्कि एक आर्थिक मजबूरी थी। उनके पिता, महान निर्देशक राज कपूर, ने 1970 में फिल्म 'मेरा नाम जोकर' बनाई थी, जो बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई।
इससे राज कपूर को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और वह कर्ज में डूब गए। इस कर्ज को चुकाने के लिए उन्होंने 1973 में 'बॉबी' बनाई, जिसमें उन्होंने ऋषि कपूर को बतौर लीड हीरो कास्ट किया।
फिल्म सुपरहिट रही और ऋषि कपूर रातोंरात स्टार बन गए।
नीतू सिंह के साथ 12 फिल्मों की सुपरहिट जोड़ी
ऋषि कपूर और नीतू सिंह की जोड़ी 70-80 के दशक की सबसे हिट जोड़ियों में से एक रही। दोनों ने एक साथ 12 फिल्मों में काम किया, जिनमें से ज्यादातर बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं। इनकी ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री इतनी शानदार थी कि दर्शकों ने इन्हें बॉलीवुड की गोल्डन जोड़ी बना दिया।
ऋषि कपूर और नीतू सिंह की 12 फिल्में:
- खेल खेल में (1975)
- रफू चक्कर (1975)
- कभी कभी (1976)
- अमर अकबर एंथनी (1977)
- परवरिश (1977)
- दूसरा आदमी (1977)
- अंजाने में (1978)
- प्रियतमा (1978)
- महबूबा (1978)
- जहरीला इंसान (1979)
- जिंदा दिल (1979)
- धन दौलत (1980)
इन फ़िल्मों में रोमांस, कॉमेडी और फैमिली ड्रामा का बेहतरीन मिश्रण था, जिससे ये जोड़ी लोगों के दिलों में बस गई। रील लाइफ से रियल लाइफ तक, इनकी प्रेम कहानी भी किसी फ़िल्मी कहानी से कम नहीं थी।
एक जैसे किरदार निभाने का मलाल
ऋषि कपूर ने अपने करियर में ज्यादातर रोमांटिक हीरो का किरदार निभाया। वह अपने दौर के सबसे लोकप्रिय लवर्स बॉय में से एक थे। हालांकि, अपने आखिरी दिनों में उन्होंने कई बार यह कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस रहा कि उन्होंने ज्यादा विविधतापूर्ण (versatile) भूमिकाएं नहीं कीं।
- वह हमेशा चाहते थे कि उन्हें एक्शन और ग्रे शेड्स वाले किरदार करने को मिलें, लेकिन निर्माता-निर्देशक उन्हें सिर्फ रोमांटिक फिल्मों तक सीमित रखते थे।
- 80 के दशक के बाद जब बॉलीवुड में एक्शन हीरो का दौर शुरू हुआ (अमिताभ बच्चन, सनी देओल, संजय दत्त), तब ऋषि कपूर की रोमांटिक छवि पिछड़ने लगी।
- 'अग्निपथ' (2012) और 'डी-डे' (2013) में निगेटिव रोल करने के बाद उन्होंने खुद कहा कि उन्हें पहले ऐसे किरदार निभाने का मौका नहीं मिला।
उन्होंने अपनी आत्मकथा 'खुल्लम खुल्ला' में भी इस बात का जिक्र किया कि वह अपने इमेज से बाहर निकलना चाहते थे, लेकिन बॉलीवुड ने उन्हें रोमांस तक सीमित कर दिया।
ऋषि कपूर की दूसरी पारी: चरित्र भूमिकाओं में भी सुपरहिट
हालांकि, अपने करियर के आखिरी दौर में ऋषि कपूर ने कई बेहतरीन चरित्र भूमिकाएं निभाईं, जो साबित करती हैं कि वह एक बेहतरीन अभिनेता थे।
कुछ यादगार फिल्मों की झलक:
- 'अग्निपथ' (2012): कांचा चीना के बादशाह 'रौफ लाला' का दमदार निगेटिव रोल।
- 'डी-डे' (2013): अंडरवर्ल्ड डॉन 'गोल्डमैन' का किरदार।
- 'कपूर एंड सन्स' (2016): 90 साल के दादा का इमोशनल और मज़ेदार रोल।
- 'मुल्क' (2018): एक गंभीर सामाजिक मुद्दे पर बनी फिल्म में बेहतरीन अभिनय।
- '102 नॉट आउट' (2018): अमिताभ बच्चन के साथ पिता-पुत्र की शानदार कहानी।
निष्कर्ष: ऋषि कपूर की विरासत
ऋषि कपूर की कहानी सिर्फ एक सुपरस्टार की नहीं, बल्कि संघर्ष, सफलता और बदलाव की भी है।
- उन्होंने पिता के कर्ज को चुकाने के लिए बॉलीवुड में कदम रखा, लेकिन अपनी मेहनत और टैलेंट से खुद को एक सफल अभिनेता के रूप में स्थापित किया।
- नीतू सिंह के साथ उनकी जोड़ी बॉलीवुड की सबसे पसंदीदा जोड़ियों में से एक रही।
- एक ही तरह के रोल मिलने का अफसोस होने के बावजूद उन्होंने अपने करियर के अंत में कई दमदार किरदार निभाए और अपनी अभिनय क्षमता को साबित किया।
ऋषि कपूर भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में और उनकी अदाकारी हमेशा बॉलीवुड में याद रखी जाएंगी।
आपकी राय?
ऋषि कपूर की कौन-सी फिल्म आपकी फेवरेट है? क्या आपको लगता है कि उन्हें अपने करियर में ज्यादा विविधतापूर्ण किरदार निभाने चाहिए थे? हमें कमेंट में बताएं!


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