“मैंने बीयर की तरह पेशाब पी”: जब परेश रावल ने अपनाया अजीब इलाज, डॉक्टर भी रह गए हैरान
परेश रावल, भारतीय सिनेमा के सबसे बहुआयामी अभिनेताओं में से एक हैं। कॉमेडी हो, विलेन का रोल हो या गंभीर किरदार — उन्होंने हर रंग में अपनी छाप छोड़ी है। लेकिन उनके करियर में एक ऐसा किस्सा भी है, जिसने सोशल मीडिया और फिल्मी गलियारों में खूब हलचल मचा दी। क्या है पूरा किस्सा आईए आपको बताते हैं।
परेश रावल – एक अभिनेता जिनकी अभिनय से ज्यादा किस्से भी मशहूर हैं
परेश रावल, भारतीय सिनेमा के सबसे बहुआयामी अभिनेताओं में से एक हैं। कॉमेडी हो, विलेन का रोल हो या गंभीर किरदार — उन्होंने हर रंग में अपनी छाप छोड़ी है। लेकिन उनके करियर में एक ऐसा किस्सा भी है, जिसने सोशल मीडिया और फिल्मी गलियारों में खूब हलचल मचा दी।
ये कहानी जुड़ी है 1996 में रिलीज हुई फिल्म 'घातक' से, जिसमें उनके साथ सनी देओल और डैनी डेन्जोंगपा जैसे सितारे थे।
जब 'घातक' की शूटिंग बनी परेश रावल के लिए घातक
फिल्म की शूटिंग के दौरान एक एक्शन सीन में, परेश रावल के घुटने में गंभीर चोट लग गई। वो सीन राकेश पांडे के साथ शूट हो रहा था, जिसमें उन्हें थोड़ा दौड़ना था। लेकिन अचानक से पैर फिसला और बुरी तरह चोट आई। उन्हें तुरंत मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल में डर और निराशा
अभिनेता ने खुद बताया कि उस समय उन्हें लगा कि शायद उनका एक्टिंग करियर अब खत्म हो जाएगा। डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी और कहा कि उन्हें कम से कम 2-2.5 महीने का समय लगेगा ठीक होने में। परेश रावल हताश थे — शूटिंग रुक गई थी, और दर्द लगातार बढ़ रहा था।
वीरू देवगन की अनोखी सलाह: "सुबह उठकर पेशाब पीओ"
इसी दौरान एक और सीनियर शख्स उनसे मिलने आए — एक्शन डायरेक्टर वीरू देवगन। उन्होंने परेश रावल से मिलकर एक चौंकाने वाली सलाह दी:
“सुबह उठते ही अपनी पेशाब पीना शुरू करो। फाइटर लोग ऐसा करते हैं। तुम्हारी बॉडी अंदर से खुद को ठीक कर लेगी।”
यह सुनकर परेश चौंक गए। उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि ऐसा भी कोई इलाज हो सकता है। लेकिन जब वीरू देवगन ने यह बताया कि कई फाइटर्स और मार्शल आर्टिस्ट भी इस थैरेपी को अपनाते हैं, तो परेश ने इसे अपनाने का निर्णय लिया।
यूरीन थैरेपी – इलाज या अंधविश्वास?
यूरीन थैरेपी, जिसे आयुर्वेद में शिवंबू चिकित्सा भी कहा जाता है, एक वैकल्पिक उपचार है जिसमें व्यक्ति अपनी ही यूरिन को पीता है। कहा जाता है कि इससे शरीर में इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और सेल रीजेनरेशन तेज होता है। हालांकि, चिकित्सा विज्ञान इस पद्धति को प्रमाणिक रूप से नहीं मानता।
बीयर की तरह पेशाब पीने का अनुभव
परेश रावल ने एक इंटरव्यू में बताया:
"मैंने सोचा कि अगर मुझे पेशाब पीनी है, तो मैं इसे ऐसे ही क्यों पियूं ? मैंने इसे बीयर की तरह घूंट-घूंट करके पीना शुरू किया। रोज सुबह उठकर एक गिलास में यूरिन इकट्ठा करता और पूरा पीता।"
यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन परेश इसे पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ करते रहे।
नतीजा – डॉक्टर भी रह गए दंग
15 दिनों के अंदर जब एक्स - रे कराया गया तो डॉक्टर चौंक गए। एक्स - रे में घुटने की हड्डी पर सफेद लाइनिंग दिख रही थी, जो संकेत था कि हड्डी जुड़ने लगी है। यह सामान्यत: 2-3 महीने बाद होता है, लेकिन परेश रावल सिर्फ 1.5 महीने में ठीक हो गए।
यूरीन थैरेपी के अन्य उदाहरण
भारत में प्राचीन परंपरा
भारत में कई आयुर्वेदाचार्य और योगी यूरीन थैरेपी को प्राकृतिक इलाज मानते हैं। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई भी यूरीन थैरेपी के समर्थक रहे हैं। उनका दावा था कि सुबह की पहली पेशाब सबसे ज्यादा फायदेमंद होती है।
मेडिकल साइंस का नजरिया
- चिकित्सा विज्ञान में यूरीन को बॉडी का वेस्ट माना जाता है।
- डॉक्टरों के मुताबिक यूरीन में टॉक्सिन्स होते हैं, इसलिए इसे पीने की सलाह नहीं दी जाती।
- लेकिन कई होम्योपैथी और आयुर्वेदिक विशेषज्ञ इससे होने वाले लाभों को स्वीकार करते हैं।
परेश रावल की ईमानदारी – एक्टिंग के साथ स्वास्थ्य के लिए भी समर्पण
परेश रावल के इस फैसले से उनकी प्रोफेशनल डेडिकेशन का पता चलता है। जब बाकी लोग ऑपरेशन या लंबे आराम का रास्ता चुनते हैं, उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा और अनुशासन को अपनाया।
आज की पीढ़ी को क्या सिखाता है ये किस्सा?
- डिसिप्लिन और कमिटमेंट से बड़ी से बड़ी परेशानी को हराया जा सकता है।
- असंभव जैसा दिखने वाला भी तरीका काम कर सकता है, अगर उस पर विश्वास हो।
- कभी-कभी दवा से ज़्यादा आत्मबल काम आता है।
वर्कफ्रंट – परेश रावल अब भी हैं पूरी तरह एक्टिव
आने वाली फिल्में
- 'भूत बंगला' – प्रियदर्शन की हॉरर कॉमेडी जिसमें परेश रावल, अक्षय कुमार और तब्बू हैं।
- 'हेरा फेरी 3' – इस फिल्म में वह फिर से बाबू भैया के रोल में नज़र आएंगे, साथ में होंगे अक्षय और सुनील शेट्टी।
निष्कर्ष – पेशाब नहीं, प्रेरणा है ये कहानी
परेश रावल की ये कहानी सुनकर पहले शायद हंसी आए, लेकिन जब गहराई से सोचेंगे तो समझ आएगा कि यह सिर्फ एक इलाज नहीं था — यह एक कलाकार की जिजीविषा, समर्पण और विश्वास की कहानी थी।
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