भारत भूषण: 50 के दशक का सुपरस्टार, जो बस स्टॉप पर अकेला खड़ा मिला, अमिताभ बच्चन ने देखा लेकिन नहीं की मदद!

भारत भूषण: 50 के दशक का सुपरस्टार, जो बस स्टॉप पर अकेला खड़ा मिला, अमिताभ बच्चन ने देखा लेकिन नहीं की मदद!

बॉलीवुड की दुनिया में कई सितारे चमकते हैं, लेकिन कुछ की कहानियां दिल को छू जाती हैं। ऐसी ही एक कहानी है भारत भूषण की, जो 1950 के दशक में हिंदी सिनेमा के चमकते सितारे थे। उनकी जिंदगी में उतार-चढ़ाव का ऐसा दौर आया कि एक समय में उन्हें बस स्टॉप पर अकेले खड़ा देखा गया, और कोई उन्हें पहचान नहीं पाया। यह घटना खुद अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में साझा की थी।

भारत भूषण: 50 के दशक का सुपरस्टार, जो बस स्टॉप पर अकेला खड़ा मिला, अमिताभ बच्चन ने देखा लेकिन नहीं की मदद
भारत भूषण: 50 के दशक का सुपरस्टार, जो बस स्टॉप पर अकेला खड़ा मिला, अमिताभ बच्चन ने देखा लेकिन नहीं की मदद


प्रारंभिक जीवन और करियर की शुरुआत

भारत भूषण का जन्म 14 जून 1920 को मेरठ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता रायबहादुर मोतीलाल एक सरकारी वकील थे। भारत भूषण ने अलीगढ़ के धरम समाज कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। उनके पिता चाहते थे कि वह वकील बनें, लेकिन भारत भूषण का रुझान अभिनय की ओर था। उन्होंने कलकत्ता और फिर मुंबई का रुख किया, जहां उन्होंने 1941 में फिल्म 'चित्रलेखा' से अपने करियर की शुरुआत की।(Dainik Bhaskar)

स्टारडम की ऊंचाइयों तक का सफर

1952 में रिलीज हुई फिल्म 'बैजू बावरा' भारत भूषण के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने एक संगीतकार की भूमिका निभाई, जो अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए तानसेन को संगीत में चुनौती देता है। इस फिल्म की सफलता ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने 'मिर्जा ग़ालिब', 'बसंत बहार', 'बरसात की रात' जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया। उनकी जोड़ी मधुबाला के साथ काफी पसंद की गई।(Dainik Bhaskar, ABP Live, News18 हिंदी)

आर्थिक तंगी और करियर का पतन

भारत भूषण ने अपने भाई रमेशचंद्र गुप्ता की सलाह पर फिल्म निर्माण में हाथ आजमाया। उन्होंने 'बसंत बहार' और 'बरसात की रात' जैसी सफल फिल्मों का निर्माण किया, लेकिन इसके बाद उनकी कई फिल्में फ्लॉप हो गईं। इससे उन्हें भारी नुकसान हुआ और उन्हें अपनी संपत्ति, कारें और यहां तक कि किताबें भी बेचनी पड़ीं। उनका करियर भी ढलान पर था, और उन्हें जूनियर आर्टिस्ट के रूप में काम करना पड़ा।(Dainik Bhaskar, News18 हिंदी)

अमिताभ बच्चन द्वारा बस स्टॉप पर देखे जाने की घटना

एक बार अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में लिखा कि उन्होंने भारत भूषण को मुंबई के सांताक्रूज इलाके में एक बस स्टॉप पर अकेले खड़ा देखा। वह भीड़ में एक सामान्य नागरिक की तरह खड़े थे, और कोई उन्हें पहचान नहीं रहा था। अमिताभ ने लिखा कि वह उन्हें अपनी कार में बैठाना चाहते थे, लेकिन उन्हें डर था कि कहीं वह उन्हें शर्मिंदा न कर दें। यह दृश्य उनके मन में हमेशा के लिए बस गया।

अंतिम दिन और विरासत

भारत भूषण का निधन 27 जनवरी 1992 को हुआ। उनके अंतिम दिन आर्थिक तंगी और अकेलेपन में बीते। हालांकि, उन्होंने कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया और छोटे-मोटे काम करके अपना गुजारा करते रहे। उनकी बेटी अपराजिता के अनुसार, उन्होंने अपने अंतिम दिनों में कहा था, "मौत तो सबको आती है, लेकिन जीना सबको नहीं आता। और मुझे तो बिल्कुल नहीं आया।"(Dainik Bhaskar)

निष्कर्ष

भारत भूषण की कहानी हमें सिखाती है कि शोहरत और सफलता कितनी क्षणिक होती है। उनकी जिंदगी में आए उतार-चढ़ाव हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि हमें हमेशा विनम्र और सतर्क रहना चाहिए। उनकी अभिनय प्रतिभा और संघर्ष की कहानी आज भी लोगों को प्रेरित करती है।


नोट: यह लेख भारत भूषण के जीवन पर आधारित है, जिसमें उनके करियर, संघर्ष और अमिताभ बच्चन द्वारा बस स्टॉप पर देखे जाने की घटना का वर्णन किया गया है।



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