बॉबी देओल का बड़ा खुलासा: धर्मेंद्र क्यों नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे बनें फिल्म स्टार? जानिए देओल परिवार की अनकही कहानी
फ़िल्मी परिवारों में देओल परिवार का नाम काफ़ी चर्चित है। लोग देओल परिवार का नाम बहुत ही इज्ज़त के साथ लेते हैं। धर्मेन्द्र के साथ साथ सनी देओल, बॉबी देओल जैसे बड़े स्टार्स इस परिवार के सदस्य है। साथ ही अब सनी देओल के बच्चे भी फ़िल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बन गए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देओल परिवार के मुखिया धर्मेंद्र नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे फ़िल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बने। क्या है पूरी कहानी आपको बताते हैं..
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| बॉबी देओल का बड़ा खुलासा : धर्मेंद्र क्यों नहीं चाहते.. |
धर्मेंद्र और देओल परिवार की अनसुनी दास्तान
देओल परिवार बॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित और चर्चित परिवारों में गिना जाता है। धर्मेंद्र, सनी देओल और बॉबी देओल जैसे बड़े नाम इस परिवार का हिस्सा हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फिल्मी परिवार के मुखिया धर्मेंद्र नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा बनें? वो चाहते थे कि उनके बच्चे फ़िल्मी परिवारों से दूर रहें!
हाल ही में अभिनेता बॉबी देओल ने अपने एक इंटरव्यू में इस पर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि कैसे उनके पिता ने उन्हें और उनके भाई को फिल्मी माहौल से दूर रखने की पूरी कोशिश की थी। आइए इस ब्लॉग में विस्तार से जानते हैं कि क्या वजह थी इसके पीछे और कैसे बॉबी देओल ने इस माहौल में अपनी जगह बनाई।
धर्मेंद्र की सोच – क्यों नहीं चाहते थे इंडस्ट्री से रिश्ता
फिल्म इंडस्ट्री की बनावटी दुनिया से दूरी
बॉबी देओल ने बताया कि उनके पापा धर्मेंद्र फिल्म इंडस्ट्री की चमक-धमक से काफी दूर रहते थे। वह अपने बच्चों को इस दुनिया की बनावटी हकीकत से बचाकर रखना चाहते थे। धर्मेंद्र का मानना था कि फिल्मी दुनिया में रिश्ते सच्चे नहीं होते और वहां की पार्टी संस्कृति बच्चों के लिए ठीक नहीं होती।
"पापा मुझे किसी स्टारकिड के बर्थडे में भी नहीं जाने देते थे," बॉबी ने कहा।
"उन्हें लगता था कि ये माहौल हमारे लिए ठीक नहीं है।"
देओल हाउस – एक सामान्य परिवार
बिना पार्टी वाला फिल्मी घराना
बॉबी ने यह भी खुलासा किया कि उनका घर कभी भी किसी सेलिब्रिटी हाउस की तरह नहीं रहा।
"हम न पार्टी करते थे, न फिल्मी बातें होती थीं। घर का माहौल बिल्कुल आम लोगों जैसा था।"
धर्मेंद्र ने अपने परिवार को सामान्य जीवन जीने की सीख दी थी। फिल्मों से जुड़ा कोई भी ग्लैमर घर में नहीं घुस पाया। बॉबी मानते हैं कि इस माहौल ने उन्हें जमीन से जोड़े रखा।
स्टारकिड होते हुए भी साधारण जीवन
घर में कभी सेलिब्रिटी जैसा ट्रीटमेंट नहीं मिला
बॉबी देओल के मुताबिक, भले ही वो स्टारकिड थे, लेकिन उन्हें कभी भी स्पेशल महसूस नहीं कराया गया।
"पापा ने हमें कभी नहीं बताया कि हम खास हैं। वो चाहते थे कि हम मेहनत करें, जैसे आम लोग करते हैं।"
धर्मेंद्र का नजरिया – एक्टिंग से ज्यादा अहम है इंसानियत
एक्टिंग एक प्रोफेशन है, पर इंसान बनना ज़रूरी है
धर्मेंद्र के लिए फिल्मों में एक्टिंग केवल एक काम था, न कि लाइफस्टाइल। बॉबी कहते हैं कि उनके पिता हमेशा इंसानियत और मूल्यों को प्राथमिकता देते थे।
"उन्होंने हमें सिखाया कि स्टार बनने से ज्यादा ज़रूरी है अच्छा इंसान बनना।"
प्रोफेशनल सफर – बॉबी देओल का फिल्मी संघर्ष
शुरुआती कामयाबी और फिर स्ट्रगल का दौर
बॉबी देओल ने 'बरसात' (1995) से धमाकेदार एंट्री की थी, लेकिन उसके बाद उनका करियर उतार-चढ़ाव भरा रहा। हालांकि, वे कभी हार नहीं माने। उन्होंने कई बार फिल्मों से ब्रेक लिया, खुद को रिइन्वेंट किया और फिर से वापसी की।
आज का बॉबी देओल – नए दौर में नई पहचान
विलेन के रोल में जबरदस्त छवि
आज बॉबी देओल एक अलग अंदाज़ में नजर आ रहे हैं। उनकी नई फिल्में जैसे 'आश्रम', 'डाकू महाराज' और अब 'हरि हर वीरा मल्लू' में उन्हें नेगेटिव रोल्स में खूब सराहा जा रहा है।
"मुझे खुशी है कि लोग मुझे इस नए अवतार में पसंद कर रहे हैं," उन्होंने कहा।
वर्क फ्रंट – बॉबी देओल की आने वाली फिल्में
‘हरि हर वीरा मल्लू’ और ‘अल्फा’
बॉबी जल्द ही पवन कल्याण, नोरा फतेही और नरगिस फाखरी के साथ ‘हरि हर वीरा मल्लू’ में दिखेंगे। इसमें वह एक दमदार विलेन की भूमिका में हैं।
इसके अलावा, वह यशराज फिल्म्स की स्पाई यूनिवर्स की फिल्म 'अल्फा' में भी नजर आएंगे, जिसमें आलिया भट्ट और शरवरी उनके साथ मुख्य भूमिकाओं में हैं।
दर्शकों से जुड़ाव – असली स्टार वही जो दिल जीत सके
बॉबी मानते हैं कि असली स्टार वही है जो लोगों के दिलों में जगह बना सके।
"स्टारडम नहीं, बल्कि लोगों का प्यार सबसे बड़ा पुरस्कार है।"
निष्कर्ष – एक अभिनेता नहीं, एक प्रेरणा
बॉबी देओल की कहानी यह दिखाती है कि फिल्मी बैकग्राउंड में पैदा होना ही सब कुछ नहीं होता। असली सफलता मेहनत, धैर्य और सच्चाई से मिलती है। धर्मेंद्र ने जिस तरीके से अपने बच्चों को पाला, वह आज के माता-पिता के लिए भी एक सीख है।
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नोट: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न विश्वसनीय समाचार स्रोतों और रिपोर्ट्स पर आधारित है, जिन्हें हमने अपने शब्दों में प्रस्तुत किया है।
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